Monday, March 28, 2011

किसी दिन..

चेहरे पे मेरे ज़ुल्फ़ को बिखराओ किसी दिन..
क्या रोज़ गरजते हो, बरस जाओ किसी दिन..
खुशबू की तरह गुजरो मेरे दिल की गली से...
फूलों की तरह मुझ पर बिखर जाओ किसी दिन...
राजों की तरह उतरो मेरे दिल पे किसी शब्....
दस्तक पे मेरे हाथ की खुल जाओ किसी दिन..
में अपनी हर इक सांस उस रात को दे दूँ...
सिर रख के मेरे सीने पे सो जाओ किसी दिन..

Sunday, March 27, 2011

कोई जो पूछ ले तुमसे...

कोई जो पूछ ले तुमसे,मोहब्बत की कभी तुमने?
मुझे बस याद करके तुम, ज़रा पलकें झुका देना,
न करना दिल की बातों को, ....कभी ज़ाहिर ज़माने पे,
उसे बस टाल देना और, बहाना कुछ बना देना,
ना माने जो वो फिर भी, और अगर इकरार कर बैठे,
नमी आँखों में लाकर, इश्क का किस्सा सुना देना,
वो शायद पूछ ले कितनी, मुलाकातें हुयी अपनी?
किताबों में छुपे फूलों, को बस गिनकर बता देना||

Saturday, March 26, 2011

If I could...


If I could give you any part of me
to make your life better,
I would gladly lie down and let them take it-
just to make you well again.

...If I could siphon my own strength
and funnel it into your veins,
I would willingly give you
every single drop.

If I could walk this road for you,
I would put you upon my back,
walk until my feet were pools of blood-
and then I would crawl on my knees.

धूप छाँव ज़िन्दगी

है कभी ये मनचली सी, है कभी ये मखमली सी,
अनकहे से ज़ख्म से, कभी लगे छिली छिली सी,
धूप छाँव ज़िन्दगी ||
क्या है इसकी शक्ल ये, क्या में इसको नाम दूं?
कैसे में छुपाऊंगा, कहाँ में इसको टांग दूं?
...कहाँ सजाऊं ज़िन्दगी, धूप छाँव ज़िन्दगी||

....बस अब वो अपने आप को मेरी अमानत सी कर दे

वो रह न पाए एक पल भी हमारे बिना,
ए खुदा, उसको मेरी आदत सी कर दे||

इतना टूट के चाहूं में उसको,
के मेरी चाहत को मेरी इबादत सी कर दे||

कोई छू ना पाए अपने ख़यालात में भी उसको,
हर एक के ज़ेहन में उसकी हिफाज़त सी कर दे||

बंद आँख में भी देख पाऊं में उसको,
मेरी आँखों को ऐसी इजाज़त सी कर दे||


रखूँगा ख्याल उसका उम्र भर के लिए,
बस अब वो अपने आप को मेरी अमानत सी कर दे||

मुझे तुम छोड़ मत देना


Friday, March 25, 2011

चलो तुम छोड़ दो मुझको...

चलो तुम छोड़ दो मुझको,
मैं वापिस लौट जाता हूँ,
तुम्हें मंजिल मुबारक हो,
नया साथी मुबारक हो,
मगर फिर ऐ मेरे हमदम,
मुझे इतना तो बतला दो,
कहाँ से साथ लाये थे?
मुझे इतना तो समझा दो,
अगर ऐसा नहीं मुमकिन,
तो मुझको इस तरह तोड़ो,
के मैं  यक्सर बिखर जाऊं,
भटकने से तो बेहतर है,
तुम्हारे पास मर जाऊं||