Monday, July 15, 2013

कोई दीवार रहने दो

कोई दीवार रहने दो,
फ़क़त इज़हार रहने दो,
सफ़र में साथ चलकर भी,
मुझे इस पार रहने दो,
ना आँखों में सजाओ तुम,
ना मुझको ख़ाक होने दो,
ना तरसें तुम्हारी कुर्बत को,
मुझे बे-बाक रहने दो।
मुझे असआर में लिखो,
मगर न गुनगुनाओ तुम,
किताबों में कहीं रखकर,
मुझे फिर भूल जाओ तुम,
सुनो तुमसे ये कहना है,
सफ़र में धूल होने तक,
कोई भी भूल होने तक,
मुझे तुम माँग लेना बस,
दुआ मक़बूल होने तक |

Sunday, July 14, 2013

अभी वक़्त हैं इन्हें छोड़ जा

ये सफ़र नहीं अज़ाब है,
यहाँ हर किसी पैर नकाब है,
यहाँ बद-गुमानी का राज़ है,
यहाँ बेवफाई रिवाज़ है,
अभी होश खोने के दिन नहीं,
अभी तेरे रोने के दिन नहीं,
अभी वक़्त है इन्हें छोड़ जा,
अभी सारी नगरी अंधेर है,
अभी दिन निकलने में देर है,
अभी बहार-ए-इश्क में ना उतर,
अभी शहर सारा है बेखबर,
अभी वक़्त है इन्हें छोड़ जा,
अभी वक़्त हैं इन्हें छोड़ जा ।

Saturday, June 29, 2013

मोहब्बत कम नहीं होती

किसी के पास आने से, या किसी के दूर जाने से,
मोहब्बत कम नहीं होती किसी को आजमाने से,
जिन्हें हम याद रखते हैं वो हम को भूल जाते हैं,
नहीं होता असर इन पर अब अश्कों को बहाने से,
दिल-ए-बेताब में सूरत तेरी ऐसी सजल है,
कभी मिट नहीं सकती किसी के मिटाने से,
बिछड़ना था मुक़द्दर में, किसी से क्या गिला मगर,
नहीं शिकवा मुक़द्दर से, ना शिक़वा है ज़माने से,
अँधेरी रात है बारिश है और मैं भी तन्हा हूँ,
नहीं हासिल होगा अब इस क़दर दिल जलाने से ।

माटी की कच्ची गागर को क्या खोना क्या पाना बाबा

माटी की कच्ची गागर को क्या खोना क्या पाना बाबा,
माटी को माटी है रहना, माटी में मिल जाना बाबा |

हम क्या जानें दीवारों से कैसे धूप उतरती होगी,
रात रहे बहार जाना है, रात गए घर आना बाबा |

जिस लकड़ी को अन्दर-अन्दर दीमक बिलकुल चाट चुकी हो,
उसको ऊपर चमकाना, राख पे धूप जमाना बाबा |

प्यार की गहरी फुन्कारों से सारा बदन आकाश हुआ है,
दूध पिलाना तन डसवाना, है दस्तूर पुराना बाबा |

इन ऊँचे शहरों में पैदल सिर्फ़ दिहाती ही चलते हैं,
हमको बाज़ारों से इक दिन काँधे पर ले जाना बाबा |  ~ बशीर बद्र

कभी आना तो हल्का सा इशारा देना

कभी अाना तो हल्का सा इशारा देना,
कभी शाम, कभी आँचल का किनारा देना,
मैं अगर डूब के उभरूँ तो सहारा देना,
तेरा उल्फत मैं मुकम्मल हूँ हर पहलू से,
मुझे दर्द भी देना तो सारा देना,
मैं तुझे ग़म के समुन्दर में किनारा दूँगा,
तू मुझे हिज्र के तूफाँ में सितारा देना,
मैं तेरी याद के सेहरा में कहीं रहता हूँ,
कभी आना तो हल्का सा इशारा देना।

Monday, June 24, 2013

कोई रास्ता नही है

इस आरज़ू से आगे,
कोई रास्ता नही है,
तुम्हें किस क़दर है चाहा,
तुम्हें ये पता नहीं है।
कोई पल बिना तुम्हारे,
भला कैसे बीत जाये,
मेरे पास तुम नहीं हो,
मेरे पास कुछ नहीं है।
मेरी हर दुआ का मेहबर,
बस एक आरज़ू तुम्हारी,
इस आरज़ू से आगे,
कोई रास्ता नहीं है ।

Monday, May 27, 2013

तुम्हारे दर्द में देखो तुम्हारा कौन बनता है

यहाँ खामोश नज़रों का नज़ारा कौन बनता है,
बहुत गहरे समुन्दर का किनारा कौन बनता है।
चलो हम देखते हैं, खुद को अब बरबाद करके भी,
के इन बरबादियों में भी, हमारा कौन बनता है।
कोई शीशा अगर टूटे तो वापस जुड़ नहीं सकता,
मोहब्बत में फ़ना होकर दोबारा कौन बनता है।
चलो फिर आजमा लो तुम, सभी अपने प्यारों को,
तुम्हारे दर्द में देखो तुम्हारा कौन बनता है ।